जॉर्डन में 3 अमेरिकी सैनिकों की मौत का बदला: अमेरिका ने सीरिया और इराक में ईरान समर्थित ठिकानों पर किए ताबड़तोड़ हमले

वाशिंगटन/बगदाद:
अमेरिका और ईरान समर्थित लड़ाकों के बीच मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में तनाव चरम पर पहुंच गया है। जॉर्डन में एक अमेरिकी सैन्य अड्डे पर हुए ड्रोन हमले में 3 अमेरिकी सैनिकों की मौत और 40 से अधिक सैनिकों के घायल होने के बाद, अमेरिका ने बेहद आक्रामक रुख अपनाया है। अमेरिकी सेना ने इसके जवाब में सीरिया और इराक में मौजूद ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) और उनके समर्थित मिलिशिया (लड़ाकों) के ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए हैं।
डोनाल्ड ट्रम्प और अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) ने साफ किया है कि अमेरिकी सैनिकों पर होने वाले किसी भी हमले का अंजाम भुगतना होगा और यह कार्रवाई उसी का सीधा जवाब है।

जॉर्डन हमले से भड़का अमेरिका


यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब जॉर्डन-सीरिया सीमा के पास स्थित अमेरिकी सैन्य बेस ‘टॉवर 22’ (Tower 22) को निशाना बनाकर एक आत्मघाती ड्रोन हमला किया गया। इस हमले में पहली बार किसी दुश्मन के एक्शन में अमेरिकी सैनिकों की जान गई थी।
अमेरिका ने इस हमले के लिए ईरान समर्थित संगठन ‘इस्लामिक रेजिस्टेंस इन इराक’ को जिम्मेदार ठहराया। इस घटना के बाद अमेरिकी प्रशासन पर जवाबी कार्रवाई करने का भारी राजनीतिक दबाव था।

पेंटागन की बड़ी कार्रवाई: कई ठिकानों को बनाया निशाना


अमेरिकी राष्ट्रपति और पेंटागन के आदेश के बाद अमेरिकी वायुसेना के बी-1बी (B-1B) लांसर जैसे घातक बमवर्षक विमानों ने सीरिया और इराक में एक साथ कई ठिकानों पर बमबारी की।

  • कमांड सेंटर्स और लॉजिस्टिक्स: हमलों में लड़ाकों के कमांड एंड कंट्रोल सेंटर्स, खुफिया केंद्रों और रॉकेट-मिसाइल स्टोरेज डिपो को निशाना बनाया गया।
  • सप्लाई चेन पर चोट: अमेरिका का मुख्य उद्देश्य उन ठिकानों को तबाह करना था जहाँ से ये लड़ाके अमेरिकी सेना पर हमले के लिए हथियार और ड्रोन हासिल करते हैं।

वैश्विक स्तर पर क्या हो रहा है असर?


मिडिल ईस्ट में बड़े युद्ध की आशंका: इजरायल-हमास युद्ध के बाद से ही पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बनी हुई थी, लेकिन अमेरिका के इस सीधे हस्तक्षेप के बाद इराक और सीरिया की संप्रभुता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। इराक की सरकार ने इन अमेरिकी हमलों की कड़ी निंदा की है और इसे अपने देश की संप्रभुता का उल्लंघन बताया है।

ईरान का रुख


ईरान ने जॉर्डन में हुए ड्रोन हमले में अपना सीधा हाथ होने से इनकार किया है। हालांकि, ईरान ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि उसकी सीमाओं के भीतर या उसके हितों पर सीधा हमला किया गया, तो वह पूरी ताकत से इसका जवाब देगा।

आगे की स्थिति क्या हो सकती है ?


अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह जवाबी कार्रवाई केवल एक रात या एक दौर तक सीमित नहीं है। अमेरिका अपने सैनिकों की सुरक्षा के लिए आने वाले दिनों में भी रणनीतिक रूप से ऐसे हमले जारी रख सकता है। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह सिलसिला नहीं थमा, तो यह एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति (क्रूड ऑयल) और वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है।