उज्जैन — उज्जैन के महाकाल मंदिर क्षेत्र में पार्किंग के लिए तय एक ज़मीन को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आरोप भाजपा के आलोट विधायक चिंतामणि मालवीय पर लगे हैं कि श्रद्धालुओं के लिए तय ज़मीन को एक निजी रिसॉर्ट/होटल परियोजना के लिए हासिल किया गया। मामला लोकायुक्त, ईओडब्ल्यू और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ तक पहुंच चुका है।
क्या हैं आरोप
शिकायतकर्ताओं और विपक्ष के अनुसार महाकाल क्षेत्र की करीब 45,000 वर्ग फीट ज़मीन, जो सरकारी रिकॉर्ड में शासकीय भूमि दर्ज थी, बाद में निजी खातों में स्थानांतरित हो गई। आरोप है कि इसे एक कंपनी (जिसमें विधायक और उनके सहयोगी इक़बाल सिंह गांधी के नाम निदेशक के रूप में बताए जा रहे हैं) ने लगभग 3.82 करोड़ रुपये में ख़रीदा, और रजिस्ट्री में इसे कृषि भूमि दिखाकर करीब 3.40 करोड़ रुपये की स्टांप ड्यूटी की कथित चोरी की गई — जबकि व्यावसायिक दर से इसकी क़ीमत 31 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है।
विपक्ष और संतों की नाराज़गी
कांग्रेस नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सोशल मीडिया पर सरकार पर तीखा हमला बोला। वहीं उज्जैन के कुछ संतों ने भी इस सौदे का विरोध करते हुए कहा कि भक्तों के लिए तय जगह किसी निजी परियोजना को देना उचित नहीं। मामला मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के गृह जिले से जुड़ा होने के कारण राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील बन गया है।
विधायक का पक्ष
विधायक चिंतामणि मालवीय ने सभी आरोपों को ख़ारिज करते हुए कहा है कि रजिस्ट्री पूरी तरह कानूनी है, किसी नियम का उल्लंघन नहीं हुआ, और विवादित ज़मीन मंदिर से लगभग एक किलोमीटर दूर है। उन्होंने इसे राजनीतिक द्वेष से प्रेरित बताया। मामला अदालत में है, इसलिए अंतिम निष्कर्ष जांच और कोर्ट के फ़ैसले पर निर्भर करेगा।