कम उम्र की महिलाओं में तेजी से बढ़ रहा है Breast Cancer, जानिए किन कारणों से बढ़ रहा खतरा

The TV India | Health Desk

भारत में Breast Cancer अब सिर्फ अधिक उम्र की महिलाओं तक सीमित नहीं रह गया है। पिछले कुछ वर्षों में 40 साल से कम उम्र की महिलाओं और युवतियों में भी इसके मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे एक गंभीर संकेत मान रहे हैं और समय रहते जागरूक होने की सलाह दे रहे हैं।

पहले जहां Breast Cancer को 50 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं की बीमारी माना जाता था, वहीं अब बदलती जीवनशैली और स्वास्थ्य संबंधी आदतों के कारण कम उम्र की महिलाएं भी इसकी चपेट में आ रही हैं।


आखिर क्यों बढ़ रहे हैं Breast Cancer के मामले?

विशेषज्ञों का कहना है कि इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। आज की व्यस्त जीवनशैली, घंटों बैठकर काम करना, शारीरिक गतिविधि की कमी, जंक फूड का अधिक सेवन, मोटापा, मानसिक तनाव और पर्याप्त नींद न लेना शरीर पर नकारात्मक असर डालते हैं।

इसके अलावा हार्मोनल बदलाव, देर से शादी या गर्भधारण, स्तनपान न कराना और परिवार में पहले किसी सदस्य को Breast Cancer होना भी जोखिम बढ़ा सकता है।

हालांकि, हर मरीज में कारण अलग-अलग हो सकते हैं, इसलिए किसी भी लक्षण को हल्के में नहीं लेना चाहिए।


Breast Cancer के शुरुआती लक्षण क्या हैं?

अगर नीचे दिए गए किसी भी लक्षण का अनुभव हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें—

  • स्तन में किसी गांठ का महसूस होना।
  • स्तन के आकार या आकृति में बदलाव।
  • निप्पल से खून या असामान्य स्राव निकलना।
  • स्तन की त्वचा का सिकुड़ना या गड्ढे पड़ना।
  • लगातार दर्द या सूजन बने रहना।
  • बगल (Armpit) में गांठ महसूस होना।

ध्यान रखें कि हर गांठ कैंसर नहीं होती, लेकिन सही जांच कराना जरूरी है।


कैसे करें बचाव?

डॉक्टरों का मानना है कि स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर Breast Cancer के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

  • रोजाना कम से कम 30 मिनट व्यायाम करें।
  • संतुलित और पौष्टिक भोजन लें।
  • शरीर का वजन नियंत्रित रखें।
  • धूम्रपान और शराब से बचें।
  • तनाव कम करने के लिए पर्याप्त नींद लें।
  • समय-समय पर Breast Self-Examination करें।
  • डॉक्टर की सलाह के अनुसार Mammography या अन्य जांच कराएं।

समय पर जांच ही सबसे बड़ा बचाव

विशेषज्ञों का कहना है कि Breast Cancer का शुरुआती चरण में पता चल जाए तो इलाज की सफलता की संभावना काफी बढ़ जाती है। इसलिए किसी भी असामान्य बदलाव को नजरअंदाज न करें और जरूरत पड़ने पर तुरंत विशेषज्ञ से सलाह लें।

स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहना और नियमित जांच कराना ही इस बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है।