जंतर-मंतर पर भारी बवाल: CJP के संसद मार्च पर पुलिस का लाठीचार्ज, समर्थकों को खदेड़ा; पार्टी का आरोप– ‘निहत्थों पर हुआ हमला, पुलिस ने फेंके पत्थर’


जयपुर : राजधानी दिल्ली का ऐतिहासिक जंतर-मंतर परिसर एक बार फिर भारी राजनीतिक हंगामे और प्रदर्शन का केंद्र बन गया। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और उससे जुड़े छात्र संगठनों द्वारा आयोजित ‘संसद मार्च’ के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी झड़प देखने को मिली। प्रदर्शनकारियों को संसद भवन की तरफ बढ़ने से रोकने के लिए दिल्ली पुलिस और सुरक्षा बलों को लाठीचार्ज करना पड़ा। इस पूरी कार्रवाई के बाद इलाके में अफ़रा-तफ़री का माहौल बन गया और पुलिस ने कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया।


जंतर-मंतर से संसद मार्ग तक धक्का-मुक्की और हंगामा


प्राप्त जानकारी के अनुसार, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आह्वान पर देश के विभिन्न हिस्सों से कार्यकर्ता, युवा और छात्र दिल्ली के जंतर-मंतर पर एकत्र हुए थे। प्रदर्शनकारी अपनी विभिन्न माँगों को लेकर संसद भवन की ओर मार्च करने की योजना बना रहे थे।
जैसे ही प्रदर्शनकारियों के समूह ने जंतर-मंतर पर लगाए गए पहले सुरक्षा घेरे को पार कर संसद मार्ग की ओर बढ़ने का प्रयास किया, वहाँ पहले से तैनात दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने उन्हें रोक लिया। इस दौरान कार्यकर्ताओं और पुलिसकर्मियों के बीच तीखी बहस और धक्का-मुक्की शुरू हो गई। भीड़ को अनियंत्रित होता देख पुलिस ने लाठियाँ भाँजकर भीड़ को तितर-बितर करना शुरू कर दिया, जिससे जंतर-मंतर और आसपास की सड़कों पर भगदड़ मच गई।


CJP का बड़ा आरोप: “निहत्थे युवाओं को बेरहमी से पीटा गया”

घटना के तुरंत बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के वरिष्ठ नेताओं ने एक बयान जारी कर पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई पर कड़ा ऐतराज जताया। पार्टी ने आरोप लगाया कि:

  • शांतिपूर्ण मार्च पर हमला: पार्टी के कार्यकर्ता पूरी तरह निहत्थे थे और लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध दर्ज कराने के लिए शांतिपूर्ण ढंग से आगे बढ़ रहे थे, लेकिन पुलिस ने बिना किसी चेतावनी के उन पर लाठियाँ बरसानी शुरू कर दीं।
  • कनॉट प्लेस में पथराव के दावे: CJP का यह भी गंभीर आरोप है कि कनॉट प्लेस के पास प्रदर्शनकारियों को पीछे धकेलने के दौरान पुलिस की ओर से पथराव किया गया।
  • नेताओं और छात्रों की गिरफ्तारी: पार्टी का दावा है कि इस लाठीचार्ज में कई छात्र और कार्यकर्ता घायल हुए हैं, जबकि दर्जनों प्रमुख समर्थकों को जबरन हिरासत में लेकर अलग-अलग पुलिस थानों में भेज दिया गया है।

पुलिस का रुख: “बिना अनुमति के संसद की ओर बढ़ रही थी भीड़”

दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने पार्टी के आरोपों को खारिज करते हुए स्थिति को स्पष्ट किया है। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों को केवल जंतर-मंतर के निर्धारित स्थान पर ही शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने की अनुमति दी गई थी। संसद भवन और उसके आसपास के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा कारणों से किसी भी प्रकार के जुलूस या मार्च की अनुमति नहीं थी।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, जब भीड़ ने सुरक्षा बैरिकेड्स को तोड़कर संसद की तरफ ज़बरदस्ती घुसने की कोशिश की, तो अति-संवेदनशील सुरक्षा क्षेत्र की सुरक्षा बनाए रखने और आम जनता के बचाव के लिए आवश्यक बल प्रयोग किया गया। पुलिस ने पथराव के आरोपों को निराधार बताया है।

सुरक्षा व्यवस्था कड़ी, मेट्रो और यातायात पर पड़ा असर

इस घटना के बाद मध्य दिल्ली, विशेष रूप से जंतर-मंतर, कनॉट प्लेस और संसद मार्ग के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को अत्यंत कड़ा कर दिया गया है:

  • बहुस्तरीय बैरिकेडिंग: संसद भवन की ओर जाने वाले सभी प्रमुख रास्तों पर कई परतों (Multi-layer) की बैरिकेडिंग लगा दी गई है।
  • अतिरिक्त बलों की तैनाती: मौके पर दिल्ली पुलिस के साथ-साथ रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) की अतिरिक्त कंपनियों को तैनात किया गया है।
  • यातायात डायवर्जन: सुरक्षा के मद्देनज़र जंतर-मंतर के आसपास के रास्तों पर गाड़ियों की आवाजाही को रोक दिया गया, जिससे कनॉट प्लेस और आउटर सर्कल में भारी ट्रैफिक जाम की स्थिति बन गई। इसके अलावा ऐहतियात के तौर पर नजदीकी मेट्रो स्टेशनों के कुछ गेट भी कुछ समय के लिए बंद रखे गए।

फिलहाल इलाके में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है और पुलिस पूरे क्षेत्र पर पैनी नज़र रखे हुए है।