“पेपर लीक के खिलाफ सोनम वांगचुक का आमरण अनशन: छात्रों के समर्थन में जंतर-मंतर पर बैठे भूख हड़ताल पर”

जयपुर, दिल्ली के जंतर-मंतर पर इन दिनों एक अनोखा और गंभीर विरोध प्रदर्शन चल रहा है। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के बैनर तले छात्र और सामाजिक कार्यकर्ता पिछले कई दिनों से आंदोलन कर रहे हैं। इस प्रदर्शन में सबसे बड़ा चेहरा बनकर उभरे हैं लद्दाख के प्रसिद्ध शिक्षाविद और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक। वे पिछले कई दिनों से आमरण अनशन (भूख हड़ताल) पर बैठे हैं।

‘कॉकरोच जनता पार्टी’ का प्रोटेस्ट क्यों हो रहा है?

यह प्रदर्शन देश में NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और गड़बड़ियों के खिलाफ हो रहा है। छात्रों का कहना है कि बार-बार पेपर लीक होने से युवाओं का भविष्य बर्बाद हो रहा है।मुख्य मांगें:देश के केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तुरंत अपने पद से इस्तीफा दें।परीक्षाओं में गड़बड़ी की निष्पक्ष जांच हो और फुलप्रूफ सिस्टम बनाया जाए ताकि आगे कभी पेपर लीक न हो।

सोनम वांगचुक इस आंदोलन में क्यों शामिल हुए?

सोनम वांगचुक आम तौर पर लद्दाख के पर्यावरण और वहां के अधिकारों (6th Schedule) के लिए आवाज उठाते रहे हैं। कुछ समय पहले लद्दाख आंदोलन के दौरान हुए विवाद के बाद उन्हें हिरासत में भी लिया गया था और मार्च 2026 में ही वे रिहा हुए हैं। अब वे देश के युवाओं और छात्रों के समर्थन में आगे आए हैं। वांगचुक का कहना है कि वे खुशी से अनशन पर नहीं बैठे हैं, बल्कि देश के युवाओं के भविष्य को बचाने के लिए यह कदम उठाना बेहद जरूरी था। उन्होंने 28 जून से अपना आमरण अनशन शुरू किया था।

वांगचुक की सेहत और डॉक्टरों की चिंता

अनशन के कारण सोनम वांगचुक की तबीयत लगातार बिगड़ रही है:8.5 किलो से ज्यादा वजन कम: भूख हड़ताल शुरू करने के बाद से उनका वजन काफी तेजी से गिरा है। शारीरिक दिक्कतें: डॉक्टरों के मुताबिक उनके शरीर में ‘मसल लॉस’ (मांसपेशियों का गलना) शुरू हो गया है और वे गंभीर दर्द में हैं।ब्लड प्रेशर (BP) डाउन: उनका ब्लड प्रेशर काफी नीचे गिर गया है, जिससे डॉक्टरों और उनके समर्थकों की चिंता बढ़ गई है। इसके बावजूद, जब सहयोगियों ने उनसे अनशन खत्म करने की अपील की, तो उन्होंने साफ मना कर दिया और कहा—”मुझसे अनशन तोड़ने के लिए मत कहो, मैं पीछे नहीं हटूंगा।

क्या सरकार मांगें मानेगी?

फिलहाल सरकार की तरफ से शिक्षा मंत्री के इस्तीफे या कॉकरोच जनता पार्टी की मांगों पर कोई बड़ा आधिकारिक आश्वासन नहीं आया है। आंदोलनकारियों का आरोप है कि सरकार इस मामले को लेकर पूरी तरह ‘बेपरवाह’ बनी हुई है।दूसरी तरफ, विपक्ष के कई बड़े नेता (जैसे अरविंद केजरीवाल, उद्धव ठाकरे, अखिलेश यादव और महुआ मोइत्रा) इस आंदोलन के समर्थन में आ गए हैं। अरविंद केजरीवाल ने भी वांगचुक से अनशन खत्म करने की अपील की है और वे खुद प्रदर्शन स्थल पर जाकर उनसे मुलाकात करने वाले हैं।

तबीयत और बिगड़ी तो क्या होगा?

अस्पताल में भर्ती करना: अगर वांगचुक की तबीयत क्रिटिकल (बेहद नाजुक) होती है, तो प्रशासन और डॉक्टरों की टीम सुरक्षा और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए उन्हें जबरन अस्पताल में भर्ती करा सकती है, जैसा कि आम तौर पर लंबे अनशनों के दौरान होता है।20 जुलाई का मार्च: प्रदर्शनकारियों ने एलान किया है कि वे 20 जुलाई को संसद मार्च करेंगे। अगर तब तक वांगचुक की सेहत और ज्यादा बिगड़ती है, तो यह आंदोलन दिल्ली में और बड़ा रूप ले सकता है और सरकार पर दबाव काफी ज्यादा बढ़ जाएगा।

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