मुआवजे की मांग पर फिर शुरू हुआ ‘चिता आंदोलन’, विस्थापितों ने शुरू किया क्रमिक अनशन

जयपुर। मध्य प्रदेश के छतरपुर और पन्ना जिलों में विकास परियोजनाओं से प्रभावित विस्थापितों ने ग्रामीणों के मुआवजे और पुनर्वास की मांग को लेकर एक बार फिर आंदोलन शुरू कर दिया है। केन-बेतवा लिंक परियोजना, मझगाय, रंझड़ा, नेगुआ और एनटीपीसी परियोजनाओं से प्रभावित लोग इस आंदोलन में शामिल हैं।

आंदोलन के दूसरे दिन प्रदर्शनकारियों ने क्रमिक अनशन भी शुरू कर दिया। विरोध प्रदर्शन के दौरान आदिवासी महिलाएं प्रतीकात्मक चिताओं पर लेटकर अपना विरोध जता रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि परियोजनाओं के लिए उनकी जमीनें ली गईं, लेकिन उन्हें अब तक उचित मुआवजा और पूर्ण पुनर्वास नहीं मिला है। प्रदर्शन के चलते इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है।

विस्थापितों ने लगाए गंभीर आरोप

आंदोलन कर रहे ग्रामीणों का आरोप है कि मुआवजे के लिए तैयार की गई सूची में गड़बड़ियां की जा रही हैं। उनका दावा है कि कुछ अधिकारियों द्वारा कथित तौर पर रिश्वत की मांग की गई और रिश्वत नहीं देने पर जमीन से बेदखल करने की धमकी दी गई।

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने आरोप लगाया कि परियोजनाओं के नाम पर कुछ अधिकारी और नेता भ्रष्टाचार कर रहे हैं और रसूखदार लोगों को फायदा पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि मुआवजे में हुई कथित गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार से जुड़े दस्तावेज जल्द ही सार्वजनिक किए जाएंगे।

पहले भी कर चुके हैं जल सत्याग्रह

यह पहली बार नहीं है जब परियोजनाओं से प्रभावित ग्रामीणों ने इस तरह का विरोध प्रदर्शन किया है। इससे पहले भी ग्रामीणों ने करीब 12 दिनों तक ‘जल सत्याग्रह’ किया था। इस दौरान ग्रामीण घंटों पानी में खड़े रहकर अपनी मांगों को लेकर विरोध जताते रहे थे। इसके अलावा प्रतीकात्मक चिता और अन्य विरोध प्रदर्शनों के जरिए भी प्रशासन का ध्यान अपनी मांगों की ओर खींचा गया था।

उस समय प्रशासन की ओर से लिखित आश्वासन दिए जाने के बाद आंदोलन समाप्त कर दिया गया था। हालांकि, ग्रामीणों का आरोप है कि आश्वासन के बावजूद उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसी के चलते अब विस्थापितों ने एक बार फिर आंदोलन शुरू कर दिया है।

‘मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा आंदोलन’

ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन की ओर से पहले कई बार आश्वासन दिए गए, लेकिन प्रभावित परिवारों को अब तक उनका पूरा हक नहीं मिला है। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में उचित मुआवजा, रहने के लिए जमीन और प्रभावित परिवारों का पूर्ण पुनर्वास शामिल है।

ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि जब तक सभी प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा और पुनर्वास का अधिकार नहीं मिलता, तब तक उनका ‘चिता आंदोलन’ और क्रमिक अनशन जारी रहेगा।

फिलहाल इस मामले में स्थानीय प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।